नई दिल्ली / मुंबई | बिज़नेस डेस्क: शुक्रवार-13 मार्च 2026 भारतीय शेयर बाजार (Stock Market Crash) के लिए यह दिन किसी काले अध्याय से कम नहीं था। सुबह 9:15 बजे घंटी बजी और देखते ही देखते सेंसेक्स 1,460 अंक टूटकर 74,563 पर आ गया। निफ्टी ने 488 अंकों की डुबकी लगाते हुए 23,151 का स्तर छुआ। यह गिरावट सिर्फ एक दिन की बात नहीं है – मार्च 2026 के पहले 9 कारोबारी सत्रों में से 6 में निफ्टी 1% से ज्यादा टूटा है। यह रिकॉर्ड सीधे कोविड महामारी की याद दिलाता है, जब 2020 में बाजार इसी तरह बार-बार धड़ाम होता था।
पिछले हफ्ते की बात करें तो निफ्टी 24,765 से गिरकर 23,151 पर आ गया यानी एक हफ्ते में 6.5% की गिरावट। सेंसेक्स भी 4 साल के सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन पर रहा। अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से अब सेंसेक्स 10.5% और निफ्टी 9.3% नीचे आ चुका है, यानी दोनों तकनीकी रूप से ‘करेक्शन जोन’ में प्रवेश कर चुके हैं। साल 2026 में अब तक निफ्टी 10.6% टूट चुका है। NSE के सभी बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे बड़ी गिरावट।
14 मार्च 2026 – बाज़ार का हाल (शुक्रवार बंद भाव)
| इंडेक्स / संकेतक | मौजूदा स्तर | बदलाव |
|---|---|---|
| सेंसेक्स | 74,563 | ▼ 1,470 अंक (-1.93%) |
| निफ्टी 50 | 23,151 | ▼ 488 अंक (-2.06%) |
| निफ्टी VIX (डर का सूचकांक) | 22.88 | ▲ 6.32% उछला |
| रुपया (डॉलर के मुकाबले) | ₹92.39 | ऐतिहासिक निचला स्तर |
| ब्रेंट क्रूड | $99–$107 | मनोवैज्ञानिक $100 के पास |
| BSE मार्केट कैप | – | ₹9.5 लाख करोड़ की गिरावट (एक ही सत्र में) |
Table of Contents
आखिर क्यों टूट रहा है बाजार? समझें 5 बड़े कारण
1. अमेरिका-ईरान जंग: होर्मुज़ बंद, तेल $100 के पार
पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का 14वां दिन है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद रखने की शपथ ली है। इसी रास्ते से दुनिया का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। जब से यह संकट शुरू हुआ है, 16 भारतीय मालवाहक जहाज खाड़ी में फंसे हैं। ब्रेंट क्रूड जो 7 मार्च को $87 पर था, अब $99-$107 के बीच उछल चुका है। ईरान की सेना ने धमकी दी है कि तेल $200 प्रति बैरल तक जा सकता है।
2. रुपया ऐतिहासिक निचले स्तर पर – ₹92.39 प्रति डॉलर
13 मार्च को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले ₹92.39 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुआ। जंग शुरू होने के बाद से रुपया 1% से ज्यादा कमजोर हो चुका है। कमजोर रुपया मतलब महंगा तेल आयात, बढ़ती महंगाई, और विदेशी निवेशकों का और पलायन। यह एक दुष्चक्र है जो बाजार को नीचे खींचता जा रहा है।
3. FII की बेरहम बिकवाली – मार्च में ₹45,000 करोड़ निकाले
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च 2026 में अब तक 8 दिनों में ₹45,000 करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की है । जनवरी 2025 के बाद का सबसे बड़ा आउटफ्लो। सिर्फ बुधवार 11 मार्च को ₹6,267 करोड़ की बिकवाली हुई। FII सबसे ज्यादा बैंकिंग और ऑटो शेयरों में बेच रहे हैं। जहाँ उनकी हिस्सेदारी क्रमशः 32.4% और 7.9% है। घरेलू संस्थाओं (DII) ने ₹4,966 करोड़ का सहारा दिया, लेकिन यह FII की बिकवाली के आगे काफी नहीं रहा।
4. ऑटो, बैंक और रियल्टी – सबसे बुरी हालत
Nifty Auto इस हफ्ते 6% से ज्यादा टूटा – कोविड के बाद का सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन। Nifty Bank 1,052 अंक यानी 1.8% गिरा। रियल्टी सेक्टर भी बुरी तरह धराशायी है। मिडकैप इंडेक्स 2.6% और स्मॉलकैप 2% तक टूटा। BSE पर 2,423 शेयर गिरे जबकि सिर्फ 1,850 चढ़े यानी हर तरफ बिकवाली।
5. LPG महंगाई और कंपनियों के मार्जिन पर खतरा
LPG की कीमत ₹60 बढ़ने से CPI महंगाई पर 14 बेसिस पॉइंट का दबाव पड़ेगा। MOFSL की रिपोर्ट के अनुसार अगर सरकार LPG सब्सिडी नहीं बढ़ाई तो ₹592/सिलेंडर की और बढ़ोतरी हो सकती है जिससे महंगाई 140 बेसिस पॉइंट ऊपर जाएगी। ऐविएशन, पेंट, केमिकल और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर सीधा असर पड़ेगा। Elara Capital के अनुसार इस ऊर्जा संकट से FY27 GDP ग्रोथ में पूरे 1 प्रतिशत अंक की कटौती हो सकती है।
किन बड़े शेयरों को लगी सबसे ज्यादा चोट? देखें लिस्ट
मार्च 2026 में अब तक Nifty 50 के 13 शेयर 10% से ज्यादा गिर चुके हैं:
- टाटा मोटर्स: 16% तक गिरा
- मारुति सुजुकी: 16% तक गिरा
- बजाज फाइनेंस: 14-16% तक
- L&T (लार्सन एंड टुब्रो): 13% से ज्यादा
- आइशर मोटर्स: 12-13% तक
- अल्ट्राटेक सीमेंट: 10-12% तक
- HDFC बैंक: 1.8% (शुक्रवार को)
- Eternal (पूर्व Zomato): 25% एक महीने में!
विशेषज्ञ क्या कह रहे हैं? और कितनी और गिर सकता है बाजार?
Geojit Investments के Anand James के अनुसार “निफ्टी निकट भविष्य में 23,090 का स्तर छू सकता है। 23,370-23,320 पर थोड़ा सपोर्ट है, लेकिन रिवर्सल के लिए 23,670 से ऊपर जाना जरूरी होगा। अभी बाजार पूरी तरह ‘ओवरसोल्ड’ जोन में है।”
Geojit के VK Vijayakumar के मुताबिक “ब्रेंट क्रूड $100 के आसपास है और FII की लगातार बिकवाली के बीच बड़े ब्लूचिप शेयर भी दबाव में हैं। जब तक पश्चिम एशिया में अनिश्चितता खत्म नहीं होती, बाज़ार volatile और defensive मोड में ही रहेगा।”
Elara Capital की Garima Kapoor का कहना है कि “अगर मार्च के मध्य तक होर्मुज़ से आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो भारत के बाहरी क्षेत्र पर भारी दबाव पड़ेगा जिसका असर घरेलू अर्थव्यवस्था और सरकारी खजाने पर पड़ेगा। FY27 GDP ग्रोथ 7.2% से 1 पूरा प्रतिशत अंक नीचे जा सकती है।”
इकोनॉमिक्स के विश्लेषक जी चोककालिंगम के मुताबिक “बाजार यहाँ से 5 से 10% और गिर सकता है। जो जोखिम नहीं उठा सकते, उन्हें थोड़ा हिस्सा बेचकर कैश पर आ जाना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशक बने रहें।”
इतिहास क्या कहता है? बड़े संकटों में कितना गिरता है बाजार?
जब भी दुनिया में बड़े युद्ध या आर्थिक संकट आए, BSE सेंसेक्स औसतन 11-15% तक गिरा। बिजनेस तक के विश्लेषण के अनुसार बड़े संकट में इंडेक्स औसतन 12% गिरता है:
| दशक | कितनी बार | औसत गिरावट | सबसे बड़ी गिरावट |
|---|---|---|---|
| 1970–79 | 1 बार | -11.3% | -11.3% |
| 1980–89 | 16 बार | -12.2% | -16.9% |
| 1990–99 | 19 बार | -14.1% | -23.3% |
| 2000–09 | 22 बार | -15.3% | -33.3% |
| 2010–19 | 10 बार | -11.8% | -14.5% |
| 2020–24 | 4 बार | -11.3% | -11.7% |
इतिहास की नजर से देखें तो अभी निफ्टी केवल 8% गिरा है और बड़े संकटों में औसत गिरावट 12% रही है। यानी 3-4% की गिरावट अभी और संभव है। हालांकि बाजार के पुराने जानकार यह भी कहते हैं कि जब बाजार ‘ओवरसोल्ड’ जोन में हो और घबराहट चरम पर हो तभी असली खरीदारी का मौका भी आता है।
निवेशक अभी क्या करें? Buy, Hold या Sell?
बाजार की इस तेज गिरावट में निवेशक घबरा रहे हैं। लेकिन विशेषज्ञों की सलाह है कि बिना सोचे-समझे बिकवाली करना सबसे बड़ी गलती होगी। यहाँ कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए जा रहे हैं:
लंबी अवधि के निवेशक: बने रहें। घबराकर न बेचें। बाज़ार के बड़े संकटों में हमेशा recovery आती है। अच्छे fundamentals वाले शेयर इस गिरावट में भी मजबूत रहेंगे।
SIP निवेशक: SIP बंद न करें। गिरते बाजार में SIP के जरिए ज्यादा यूनिट मिलती हैं जो रिकवरी में ज्यादा फायदा देती हैं। यह ‘Rupee Cost Averaging’ का सबसे बड़ा फायदा है।
नए निवेशक: एकमुश्त पैसा लगाने से बचें। Staggered investment यानी किश्तों में निवेश करें। 23,000-22,500 के बीच के स्तरों पर खरीदारी के अच्छे मौके मिल सकते हैं।
जोखिम से डरने वाले: अगर नींद उड़ रही है तो 20-30% पोजीशन कम करें और उसे liquid fund या FD में रखें। बाजार स्थिर होने पर वापस आएं।
ट्रेडर्स: अभी short-term ट्रेडिंग से बचें। यह बाजार टेक्निकल एनालिसिस से नहीं, बल्कि geo-political खबरों से चल रहा है जो अप्रत्याशित होती हैं।
बाज़ार की गिरावट (एक नज़र में)
सेंसेक्स: 1,470 अंक गिरा → 74,563 पर बंद (13 मार्च 2026)
निफ्टी: 488 अंक गिरा → 23,151 पर बंद; 9 दिनों में 6 बार 1%+ गिरावट
एक हफ्ते में ₹9.5 लाख करोड़ निवेशकों की संपत्ति स्वाहा
रुपया: ₹92.39/डॉलर — ऐतिहासिक निचले स्तर पर
ब्रेंट क्रूड: $99–$107 — मनोवैज्ञानिक $100 के पास
FII बिकवाली: मार्च में 8 दिनों में ₹45,000 करोड़
सबसे ज्यादा नुकसान: Tata Motors, Maruti, Bajaj Finance — 16% तक टूटे
Nifty Auto: इस हफ्ते 6% नीचे – कोविड के बाद सबसे खराब प्रदर्शन
विशेषज्ञ: बाज़ार 5-10% और गिर सकता है – लेकिन panic selling न करें.
डिस्क्लेमर:
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