Agri Commodity News: क्या तीन साल से बैन 7 एग्री कमोडिटी की फिर शुरू होगी ट्रेडिंग? जाने सबकुछ

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Agri Commodity News: देश में बढ़ती महंगाई पर काबू पाने के लिए भारतीय वित्त मंत्रालय ने तीन साल पहले 7 एग्री कमोडिटी के फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर प्रतिबंध (Ban) लगा दिया था। जिन 7 एग्री वायदा पर बैन लगाया गया था, उनमे धान (नॉन-बासमती), सरसों, गेहूं, मूंग, चना, सोयाबीन, और CPO शामिल थे । इन सभी कमोडिटी पर लगी रोक की समय सीमा 20 दिसंबर 2024 को समाप्त होने जा रही है। ऐसे में अब ये देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इन सभी प्रतिबंधित कमोडिटी की ट्रेडिंग फिर से शुरू होगी या फिर प्रतिबंधित सीमा को आगे बढ़ाया जायेगा।

क्या तीन साल से बैन 7 एग्री कमोडिटी की फिर शुरू होगी ट्रेडिंग?

गौरतलब है कि दिसंबर 2021 से 7 एग्री वायदा (धान (नॉन-बासमती), सरसों, गेहूं, मूंग, चना, सोयाबीन, और क्रूड पाम आयल ) पर लगे प्रतिबंध की मियाद 20 दिसंबर 2024 को खत्म हो रही है। अब ऐसे में इंडस्ट्री को उम्मीद है कि बाजार नियामक सेबी (SEBI) इन वायदा पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है। बाज़ार के विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल कमोडिटी मार्केट बल्कि किसानों को भी लाभ होगा।

क्यों लगाया गया था बैन?

सरकार द्वारा एग्री वायदा की ट्रेडिंग पर रोक लगाते हुए कहा था की फ्यूचर्स ट्रेडिंग की वजह से एग्री कमोडिटी के भाव को मैनिपुलेट किया जा रहा है। इससे महंगाई बढ़ती है जिससे कारण आम उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

क्या डेरिवेटिव ट्रेडिंग से महंगाई बढ़ती है?

फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर प्रतिबंध का प्रमुख तर्क यह दिया गया कि इससे महंगाई बढ़ती है। हालांकि, इस संबंध में मीडिया में कई शोध और रिपोर्ट्स सामने आ चुकी है जिनके अनुसार फ्यूचर्स ट्रेडिंग का सीधा प्रभाव महंगाई पर नहीं पड़ता। कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे मौसम, जियोपॉलिटिकल टेंशन और वैश्विक आपूर्ति जैसे कई अन्य कारण हो सकते हैं। बीते वर्षों में कई अध्ययनों ने इस बात पर जोर दिया कि फसलों के दाम और फ्यूचर्स ट्रेडिंग के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।

एग्री वायदा के बैन के हटने से होने वाले फायदे

1. एग्री वायदा शुरू होने से किसान अपनी फसल के भाव का सही अनुमान पहले से ही लगा सकेंगे, जिससे किसानों को उनकी फसलों का सही दाम मिल सकेगा। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी।

2. वायदा बाजार से रिस्क मैनेजमेंट को लेकर बेहतर विकल्प मिलेगा। उदाहरण के तौर पर, अगर एक किसान को लगता है कि उसकी फसल का दाम गिर सकता है, तो वह वायदा कांट्रैक्ट्स के जरिए खुद को हैज कर सकता है।

बैन हटाने को लेकर बाजार के एक्सपर्ट की राय

  • नीरव देसाई (GGN रिसर्च): मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि “एग्री वायदा बाजार फिर से शुरू होना चाहिए। इससे उद्योग जगत और किसानों दोनों को ही फायदा मिलेगा । आगे उन्होंने आग्रह करते हुए कहा कि दिसंबर में एडिबल ऑयल, ऑयल सीड और दालों पर वायदा शुरू करने की जरूरत है।
  • सुमित गुप्ता (McDonald Pelz): गुप्ता के मुताबिक़ कमोडिटी मार्केट को डेवलप करने के लिए फ्यूचर ऑप्शन जरूरी है। फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट से रिस्क मैनेजमेंट, प्राइस डिस्कवरी और विजिबिलिटी में काफी मदद मिलती है। दुनियाभर में फ्यूचर कमोडिटी में लिक्विडिटी अ्च्छी है। भारत सरकार के पास एग्री कमोडिटी का सबसे बड़ा स्टॉक है, जिससे इस कदम का सकारात्मक असर पड़ेगा।

(डिस्क्लेमर: Business Tak पर दी गई सभी जानकारी, सलाह और विचार एक्सपर्ट, ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार हैं, वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके प्रति किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं है। किसी भी तरह का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें।)

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Anu

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अनु कैरों है। मैंने साल 2016 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बिजनेस इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री की है। मैं एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हूं। मुझे बिजनेस सेक्शन में पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, इकोनॉमी जैसे विषयों पर ब्लॉग लिखना बेहद पसंद हैं। मेरा उद्देश्य पाठकों को फाइनेंस जगत से जुड़ी जानकारियां सरल हिंदी भाषा में उपलब्ध करवाना है।

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