Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया आज एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है, और इस बार की जो प्रमुख वजह है वो है डॉलर ($) के मुक़ाबले रुपये में आई गिरावट, इस गिरावट ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। आज यानी मंगलवार 14 अक्टूबर को भारतीय रुपया (₹) अमेरिकी डॉलर ($) के मुकाबले 12 पैसे फिसलकर 88.80 पर बंद हुआ, जो की रुपए का अब तक का सर्वाधिक निचला स्तर है।
रुपये की इस कमजोरी के पीछे घरेलू शेयर बाज़ार की गिरावट और रातोंरात डॉलर में आई मजबूती की बड़ी भूमिका मानी जा रही है। विदेशी मुद्रा कारोबारियों के मुताबिक, दुनिया भर में बढ़ते जोखिम-विरोधी माहौल ने विदेशी पूंजी को भारत से बाहर खींच लिया, जिससे रुपये पर दबाव और बढ़ गया।
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RBI का सहारा और कच्चे तेल की राहत
हालांकि, कुछ राहत की बात यह रही कि कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और भारतीय रिज़र्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप ने रुपये की गिरावट को थोड़ा थामने का काम किया। इंटरबैंक फॉरेक्स मार्केट में रुपया दिन की शुरुआत 88.73 पर हुई, लेकिन कारोबार के दौरान यह 88.81 के निचले स्तर तक लुढ़क गया। इससे पहले 30 सितंबर को भी रुपये ने 88.81 का स्तर छुआ था. यानी यह अब लगातार दूसरी बार है जब रुपया अपने रिकॉर्ड लो पर बंद हुआ है।
डॉलर इंडेक्स और तेल बाजार में हलचल
इस बीच, U.S. Dollar Index 0.11% बढ़कर 99.38 पर पहुंच गया, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को दर्शाता है। वहीं, वैश्विक तेल बेंचमार्क Brent Crude वायदा 2.16% गिरकर 61.95 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल में यह गिरावट हालांकि भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए एक राहत भरा संकेत मानी जा रही है।
विशेषज्ञों की राय: कहां रुकेगा रुपया?
मिराए एसेट शेयरखान के करेंसी एवं कमोडिटी एनालिस्ट अनुज चौधरी का कहना है की,
“अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें नीचे रहीं और FII निवेश जारी रहा, तो रुपये को कुछ मजबूती मिल सकती है। इसके अलावा, अमेरिका में संभावित सरकारी शटडाउन और फेडरल रिज़र्व की ब्याज दरों में कटौती की संभावना भी डॉलर पर दबाव डाल सकती है।”
HDFC सिक्योरिटीज़ के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट दिलीप परमार ने कहा कि
“डॉलर की व्यापक मजबूती और क्षेत्रीय मुद्राओं की कमजोरी ने भारतीय रुपये को निचले स्तर पर पहुंचा दिया है। हालांकि, RBI के हस्तक्षेप और पूंजी प्रवाह से स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।”
महंगाई और अर्थव्यवस्था पर असर
सितंबर महीने में खुदरा महंगाई (CPI) घटकर 1.54% पर आ गई, जो अगस्त में 2.07% थी। इसी तरह थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति भी घटकर 0.13% रह गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों से आरबीआई को ब्याज दरों को स्थिर रखने या भविष्य में घटाने की गुंजाइश मिल सकती है , जिससे रुपये को मध्यम अवधि में कुछ राहत मिल सकती है।
क्या आगे सुधरेंगे रुपये के हालात?
फिलहाल बाजार की नज़र डॉलर-रुपये के हाजिर भाव पर टिकी हुई है, जो 88.50 से 89 के दायरे में रहने की उम्मीद जताई जा रही है। निवेशक उम्मीद लगाए बैठे हैं कि वैश्विक हालात में थोड़ी स्थिरता और घरेलू नीतिगत सुधारों से रुपया धीरे-धीरे मजबूत स्थिति में लौट सकता है।
लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है की! क्या रुपये की यह गिरावट थमेगी या आने वाले दिनों में नया रिकॉर्ड लो देखने को मिलेगा? खैर ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा की क्या रहेगा। लेकिन निवेशकों के लिए हमारी सलाह है की वो हर परिस्थिति के लिए अपने आप को तैयार रखें । किसी भी प्रकार का निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय-विमर्श अवश्य कर ले ताकि किसी बड़े नुकसान से बच सके और अच्छा मुनाफा कमा सके।
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