SEBI F&O Report : शेयर बाजार में F&O ट्रेडर्स को लगा ₹91,685 करोड़ का चूना, SEBI की रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

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हाइलाइट्स– SEBI F&O Report अगस्त 2026

  • 30 साल से कम उम्र के 43% ट्रेडर्स में से 89% को घाटा उठाना पड़ा.
  • FY26 में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स 18% घटकर 87.5 लाख रह गए, FY16 के बाद पहली गिरावट.
  • कुल 87.7% ट्रेडर्स को घाटा हुआ, कुल नुकसान ₹91,685 करोड़ रहा.
  • ऑप्शंस ट्रेडिंग से ही 92% घाटा हुआ, यानी इंडेक्स ऑप्शंस सबसे बड़ी वजह रहा.

SEBI F&O Report 2026 in Hindi : शेयर बाजार के डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट में पैसा लगाने वालों के लिए सेबी की एक ताज़ा रिपोर्ट चौंकाने वाली तस्वीर सामने लाई है. अगस्त 2026 में जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या 18% घटकर 87.5 लाख रह गई, जो FY25 में 106.2 लाख थी. यह FY16 के बाद पहली बार है जब ट्रेडर्स की संख्या साल-दर-साल घटी है. इसके बावजूद कुल 87.7% ट्रेडर्स को घाटा हुआ, और सबका मिलाकर कुल नुकसान ₹91,685 करोड़ रहा.

असल में यह गिरावट सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं. सेबी और सरकार की तरफ से लागू किए गए नियमों का असर, बढ़ता ट्रांजेक्शन कॉस्ट और ऑप्शंस ट्रेडिंग का बढ़ता जोखिम- इन सबने मिलकर इस बदलाव को आकार दिया है.

कितने नए ट्रेडर्स आए, कितने बाहर निकले?

रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में नए ट्रेडर्स की एंट्री करीब 40% घटकर 20.8 लाख रह गई, जबकि FY25 में यह आंकड़ा 34.3 लाख था और FY24 में सबसे ज़्यादा 43.1 लाख था. वहीं दूसरी तरफ बाहर निकलने वालों की रफ्तार तेज हुई है.

FY25 में ट्रेडिंग करने वाले करीब 46 लाख लोगों ने FY26 में कोई ट्रेड नहीं किया, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 26 लाख था- यानी करीब 76% की बढ़ोतरी. साफ है कि जितने लोग नए आए, उससे कहीं ज़्यादा लोग बाजार छोड़ गए.

किसे कितना घाटा हुआ, कितनों को फायदा?

रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में 87.7% ट्रेडर्स को घाटा हुआ, जो FY25 के 90.9% से थोड़ा कम है. हालांकि घाटे में रहने वालों का औसत नुकसान ₹1.13 लाख से बढ़कर ₹1.17 लाख हो गया- यानी कम लोगों ने ट्रेड किया, लेकिन जिन्होंने किया, उन्हें औसतन ज़्यादा नुकसान झेलना पड़ा.

खास बात ये है कि घाटे में रहने वालों का औसत नुकसान ₹1.47 लाख रहा, जबकि मुनाफा कमाने वालों का औसत फायदा सिर्फ ₹1.22 लाख था- यानी औसत नुकसान, औसत मुनाफे से करीब 21% ज़्यादा रहा. रिपोर्ट यह भी बताती है कि करीब 23% ट्रेडर्स ने ही कुल घाटे का करीब 90% हिस्सा झेला.

पैरामीटरFY25FY26
एक्टिव ट्रेडर्स106.2 लाख87.5 लाख
घाटे में रहने वालों का हिस्सा90.9%87.7%
कुल नेट घाटा₹1.12 लाख करोड़₹91,685 करोड़
प्रति व्यक्ति औसत घाटा₹1.13 लाख₹1.17 लाख

ऑप्शंस ट्रेडिंग ही क्यों बनी सबसे बड़ा खतरा?

रिपोर्ट के मुताबिक कुल इंडिविजुअल घाटे का 92% हिस्सा सिर्फ ऑप्शंस ट्रेडिंग से आया. वहीं ऑप्शंस में घाटे में रहने वालों का हिस्सा 87.7% रहा, जबकि फ्यूचर्स में यह सिर्फ 66% था.

इसकी वजह ये है कि 99.3% इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने साल में कम से कम एक बार ऑप्शंस में ट्रेड किया, और 93% ने सिर्फ ऑप्शंस में ही ट्रेडिंग की. वहीं सिर्फ 6.6% ट्रेडर्स ने फ्यूचर्स में हाथ आजमाया. यानी ज़्यादातर रिटेल पैसा और जोखिम, दोनों ऑप्शंस में ही जमा हैं.

किन ट्रेडर्स को सबसे ज़्यादा घाटा हुआ?

रिपोर्ट के डेमोग्राफिक आंकड़े भी दिलचस्प हैं. 30 साल से कम उम्र के ट्रेडर्स FY26 में कुल ट्रेडर्स का 43% रहे, जो FY22 में सिर्फ 31% थे. इसी युवा वर्ग में घाटे में रहने वालों का हिस्सा भी सबसे ज़्यादा 89% रहा, जबकि 60 साल से ऊपर के ट्रेडर्स में यह आंकड़ा 81% था.

वहीं आमदनी के हिसाब से देखें तो करीब तीन-चौथाई ट्रेडर्स सालाना ₹5 लाख से कम कमाने वाले वर्ग से आते हैं. यह वर्ग कुल ट्रेडिंग टर्नओवर का 43% हिस्सा रखता है, लेकिन कुल घाटे का 53% इन्हीं के खाते में गया. भौगोलिक तौर पर भी बड़े शहरों से बाहर के इलाकों की हिस्सेदारी अब कुल ट्रेडर्स में करीब दो-तिहाई है.

  • 30 साल से कम उम्र वालों में 89% को घाटा हुआ
  • ₹5 लाख से कम आमदनी वालों को कुल घाटे का 53% हिस्सा
  • टॉप-30 शहरों से बाहर के ट्रेडर्स अब कुल ट्रेडर्स का करीब दो-तिहाई
  • महिला ट्रेडर्स का हिस्सा FY24 के 13.7% से बढ़कर FY26 में 17.1% हुआ

सेबी के नियमों का कितना असर दिखा?

नवंबर 2024 में सेबी ने एक्सपायरी-डे ट्रेडिंग पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए थे, जिनमें साप्ताहिक कॉन्ट्रैक्ट को हर एक्सचेंज पर सिर्फ एक इंडेक्स तक सीमित करना शामिल था. इन उपायों के बाद इंडेक्स ऑप्शंस में भागीदारी काफी घटी.

रिपोर्ट के मुताबिक Q2 से Q4 FY25 के बीच ऑप्शंस में भागीदारी 25.8% घटी, जबकि इंडेक्स ऑप्शंस में यह गिरावट 26.8% तक रही. हालांकि इसके साथ ही प्रीमियम टर्नओवर में शुरुआती गिरावट के बाद रिकवरी भी देखी गई- अप्रैल-नवंबर 2024 के औसत ₹66,000 करोड़ रोज़ाना टर्नओवर से गिरकर यह दिसंबर 2024-मार्च 2025 में ₹55,000 करोड़ पर आया, लेकिन फिर बढ़कर H2 FY26 में करीब ₹82,000 करोड़ तक पहुंच गया.

ट्रांजेक्शन कॉस्ट कितनी बड़ी भूमिका निभा रहा है?

रिपोर्ट के मुताबिक इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने FY25 और FY26 में करीब ₹25,000 करोड़ सालाना ट्रांजेक्शन कॉस्ट के तौर पर चुकाए. इसमें भी सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT का हिस्सा FY22 के 13% से बढ़कर FY26 में 27% हो गया है, जबकि STT की रकम ₹4,920 करोड़ से बढ़कर ₹6,645 करोड़ हो गई.

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 122.6 लाख में से करीब 43 लाख ट्रेडर्स के पास FY26 के अंत में कोई इक्विटी पोर्टफोलियो ही नहीं था, यानी वे बिना किसी शेयर होल्डिंग के सीधे डेरिवेटिव्स में उतरे थे.

SEBI का आधिकारिक लिंक:

Study – Profitability of Individual Traders in the Equity Derivatives Segment (FY25–FY26)

SEBI F&O Report से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब (FAQs)

FY26 में F&O ट्रेडिंग में कुल कितना घाटा हुआ?

SEBI की रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में इंडिविजुअल ट्रेडर्स को कुल ₹91,685 करोड़ का नेट घाटा हुआ, जो FY25 के ₹1.12 लाख करोड़ से 18% कम है. इसके बावजूद 87.7% ट्रेडर्स घाटे में ही रहे.

F&O ट्रेडर्स की संख्या में कितनी गिरावट आई?

FY26 में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या 18% घटकर 87.5 लाख रह गई, जो FY25 में 106.2 लाख थी. यह FY16 के बाद ट्रेडर्स की संख्या में पहली सालाना गिरावट है.

सबसे ज़्यादा घाटा किस प्रोडक्ट में हुआ?

कुल इंडिविजुअल घाटे का 92% हिस्सा ऑप्शंस ट्रेडिंग से आया, खासकर इंडेक्स ऑप्शंस से. ऑप्शंस में 87.7% ट्रेडर्स को घाटा हुआ, जबकि फ्यूचर्स में यह आंकड़ा सिर्फ 66% रहा.

किस उम्र और आमदनी वर्ग को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ?

30 साल से कम उम्र के 89% ट्रेडर्स को घाटा हुआ, जो सबसे ज़्यादा है. वहीं सालाना ₹5 लाख से कम कमाने वाले ट्रेडर्स ने कुल टर्नओवर का 43% हिस्सा रखते हुए भी कुल घाटे का 53% झेला.

सेबी के नवंबर 2024 के नियमों का क्या असर दिखा?

नवंबर 2024 के बाद इंडेक्स ऑप्शंस में भागीदारी 26.8% तक घटी और एक्सपायरी-डे ट्रेडिंग का हिस्सा भी कुछ कम हुआ. हालांकि टर्नओवर में शुरुआती गिरावट के बाद बाद के महीनों में मज़बूत रिकवरी भी देखी गई.

नोट : निवेश से पहले सर्टिफाइड सलाहकार से सलाह लें.

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Anu

नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम अनु कैरों है। मैंने साल 2016 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बिजनेस इकोनॉमिक्स में मास्टर डिग्री की है। मैं एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर हूं। मुझे बिजनेस सेक्शन में पर्सनल फाइनेंस, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, इकोनॉमी जैसे विषयों पर ब्लॉग लिखना बेहद पसंद हैं। मेरा उद्देश्य पाठकों को फाइनेंस जगत से जुड़ी जानकारियां सरल हिंदी भाषा में उपलब्ध करवाना है।

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