स्टोरी हाइलाइट्स
- FY26 में प्रॉपराइटरी ट्रेडर्स ने सबसे ज़्यादा करीब ₹44,000 करोड़ का ग्रॉस प्रॉफिट कमाया.
- टॉप 10 प्रॉप फर्मों ने अकेले कैटेगरी के कुल मुनाफे का 74.5% यानी ₹33,124 करोड़ कमाया.
- FPIs और प्रॉप ट्रेडर्स के 99% प्रॉफिट सिर्फ एल्गो एंटिटीज़ से आए.
- इंडिविजुअल ट्रेडर्स में सिर्फ 15% ने ही एल्गो ट्रेडिंग का इस्तेमाल किया.
SEBI Derivatives Report: देश के इक्विटी डेरिवेटिव्स बाजार में असली मुनाफा किसके हाथ लगता है, इसका जवाब सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) की ताज़ा रिपोर्ट ने साफ कर दिया है. अगस्त 2026 में जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक FY26 में प्रॉपराइटरी यानी प्रॉप ट्रेडर्स ने करीब ₹44,000 करोड़ का सबसे बड़ा ग्रॉस प्रॉफिट कमाया, लेकिन खास बात ये है कि इसमें भी ज़्यादातर हिस्सा सिर्फ टॉप 10 फर्मों के पास ही सिमटा रहा. इन टॉप 10 प्रॉप ट्रेडर्स (Prop traders) ने अकेले ₹33,124 करोड़ यानी कैटेगरी के कुल मुनाफे का 74.5% हिस्सा अपने नाम किया.

असल में यह मुनाफा सिर्फ इत्तेफाक नहीं है, बल्कि इसके पीछे इन फर्मों की बड़ी ट्रेडिंग वॉल्यूम और एल्गोरिद्म आधारित ट्रेडिंग का हाथ है. रिपोर्ट बताती है कि यही चंद फर्में ऑप्शंस ट्रेडिंग वॉल्यूम का करीब 85% और फ्यूचर्स वॉल्यूम का 65% हिस्सा अकेले संभालती हैं.
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किस कैटेगरी ने कितना कमाया?
FY26 में प्रॉप ट्रेडर्स के बाद सबसे ज़्यादा मुनाफा फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स यानी FPIs ने कमाया, जो करीब ₹14,000 करोड़ रहा. इसके बाद कॉरपोरेट्स का मुनाफा करीब ₹8,000 करोड़, म्यूचुअल फंड्स का करीब ₹3,000 करोड़ और पार्टनरशिप फर्म/LLP का भी करीब ₹3,000 करोड़ रहा.
दिलचस्प बात ये है कि इंडिविजुअल ट्रेडर्स ही एकमात्र ऐसी कैटेगरी रहे जिन्हें कुल मिलाकर घाटा हुआ. हालांकि रिटेल ट्रेडर्स का ग्रॉस घाटा FY25 के करीब ₹98,000 करोड़ से घटकर FY26 में करीब ₹72,000 करोड़ रह गया, यानी 26% की कमी आई.
| कैटेगरी | FY26 का ग्रॉस प्रॉफिट/लॉस |
|---|---|
| प्रॉपराइटरी ट्रेडर्स | ~₹44,000 करोड़ (मुनाफा) |
| FPIs | ~₹14,000 करोड़ (मुनाफा) |
| कॉरपोरेट्स | ~₹8,000 करोड़ (मुनाफा) |
| म्यूचुअल फंड्स | ~₹3,000 करोड़ (मुनाफा) |
| पार्टनरशिप फर्म/LLP | ~₹3,000 करोड़ (मुनाफा) |
| इंडिविजुअल ट्रेडर्स | ~₹72,000 करोड़ (घाटा) |
बाकी संस्थागत निवेशकों का मुनाफा क्यों घटा?
खास बात ये है कि FY26 में ज़्यादातर गैर-इंडिविजुअल कैटेगरी का मुनाफा पिछले साल के मुकाबले घट गया. FPIs के मुनाफे में सबसे बड़ी 55% की गिरावट आई, इसके बाद म्यूचुअल फंड्स में 54%, पार्टनरशिप फर्म/LLP में 38% और कॉरपोरेट्स में 22% की कमी दर्ज हुई.
वहीं प्रॉप ट्रेडर्स का मुनाफा सिर्फ 3% ही घटा, जो बाकी कैटेगरी के मुकाबले काफी कम गिरावट है. यानी बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद प्रॉप ट्रेडिंग फर्मों की पकड़ अपेक्षाकृत मज़बूत बनी रही.
टॉप फर्मों के पास ही क्यों सिमटा है ज़्यादातर मुनाफा?
रिपोर्ट के मुताबिक प्रॉप ट्रेडिंग डेस्क देश के डेरिवेटिव्स बाजार में सबसे बड़े लिक्विडिटी प्रोवाइडर हैं, और कुल टर्नओवर का करीब 60% हिस्सा अकेले इन्हीं के पास है. इसके मुकाबले FPIs का हिस्सा सिर्फ करीब 7% है.
यह जमावड़ा ऑप्शंस ट्रेडिंग में सबसे ज़्यादा है. इंडेक्स ऑप्शंस में टॉप 5 प्रॉप एंटिटीज़ का हिस्सा 62%, टॉप 10 का 85% और टॉप 20 का 90% है. स्टॉक ऑप्शंस में भी कुछ इसी तरह का पैटर्न दिखता है, जहां टॉप 5 का हिस्सा 53% और टॉप 10-20 का हिस्सा 85-89% के बीच है.
- प्रॉप ट्रेडर्स के पास कुल टर्नओवर का करीब 60% हिस्सा
- इंडेक्स ऑप्शंस में टॉप 10 प्रॉप फर्मों का 85% वॉल्यूम शेयर
- FPIs के पास कुल टर्नओवर का सिर्फ करीब 7% हिस्सा
- टॉप 10 FPIs ने कैटेगरी के कुल मुनाफे का 49.3% कमाया
FPIs का मुनाफा कैसे बंटा है?
FPIs के मामले में भी मुनाफा कुछ चुनिंदा फर्मों के पास ही सिमटा दिखता है. टॉप 10 FPIs, जो कुल एक्टिव FPIs का सिर्फ 1.4% हैं, ने ₹6,852 करोड़ यानी कैटेगरी के कुल मुनाफे ₹13,896 करोड़ का 49.3% हिस्सा कमाया.
हालांकि FPIs का पैटर्न प्रॉप ट्रेडर्स से थोड़ा अलग है. स्टॉक ऑप्शंस में टॉप 5 FPIs का हिस्सा सिर्फ 4% है, लेकिन टॉप 10 का हिस्सा अचानक 85% तक पहुंच जाता है- यानी असली उछाल 6वें से 10वें नंबर की फर्मों से आता है. वहीं इंडेक्स ऑप्शंस में टॉप 20 FPIs का हिस्सा सिर्फ करीब 20% ही है, जो बाकी सेगमेंट के मुकाबले कहीं ज़्यादा बंटा हुआ है.
एल्गो ट्रेडिंग का असली दबदबा कितना है?
रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि FPIs और प्रॉप ट्रेडर्स के कुल मुनाफे का 99% हिस्सा सिर्फ एल्गो एंटिटीज़ से आया है, यानी ऐसी फर्में जिन्होंने साल में कम से कम एक बार एल्गोरिद्म के ज़रिए ऑर्डर दिया हो.
FY26 में 432 में से 372 FPIs यानी 86%, और 693 में से 323 प्रॉप ट्रेडर्स यानी 47% ने एल्गो ट्रेडिंग का इस्तेमाल किया. इसके उलट इंडिविजुअल ट्रेडर्स में सिर्फ 15% ने ही एल्गो का इस्तेमाल किया, और रिपोर्ट के मुताबिक यह आंकड़ा भी असली तस्वीर से कुछ ज़्यादा है, क्योंकि इसमें ब्रोकर के ऑटो स्क्वायर-ऑफ जैसे मामले भी शामिल हैं.
FY24 से FY26 के बीच एल्गो ट्रेडिंग करने वाली फर्मों की संख्या भी लगातार बढ़ी है. NSE पर FPI एल्गो एंटिटीज़ 306 से बढ़कर 372 हो गईं, प्रॉप एल्गो एंटिटीज़ 279 से 323 हुईं, और DII एल्गो एंटिटीज़ तो 33 से बढ़कर 69 तक यानी दोगुने से भी ज़्यादा हो गईं. फिलहाल यह साफ नहीं है कि आने वाले सालों में यह जमावड़ा और बढ़ेगा या नियामकीय बदलावों से इसमें कोई कमी आएगी, इस पर सेबी की अगली समीक्षा में ही तस्वीर साफ होगी.
ये भी पढ़े – शेयर बाजार में F&O ट्रेडर्स को लगा ₹91,685 करोड़ का चूना
डेरिवेटिव्स बाजार से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल और उनके जवाब (FAQs)
डेरिवेटिव्स बाजार में सबसे ज़्यादा मुनाफा किसने कमाया?
FY26 में प्रॉपराइटरी ट्रेडर्स ने सबसे ज़्यादा करीब ₹44,000 करोड़ का ग्रॉस प्रॉफिट कमाया, इसके बाद FPIs का मुनाफा करीब ₹14,000 करोड़ रहा. इंडिविजुअल ट्रेडर्स ही एकमात्र कैटेगरी रहे जिन्हें कुल मिलाकर घाटा हुआ.
टॉप प्रॉप ट्रेडिंग फर्मों ने कितना मुनाफा कमाया?
टॉप 10 प्रॉप ट्रेडर्स ने अकेले ₹33,124 करोड़ कमाया, जो कैटेगरी के कुल मुनाफे ₹44,483 करोड़ का 74.5% हिस्सा है. यह सिर्फ 2.3% फर्मों के पास कैटेगरी का ज़्यादातर मुनाफा जमा होने को दिखाता है.
एल्गो ट्रेडिंग का डेरिवेटिव्स बाजार में कितना दबदबा है?
FPIs और प्रॉप ट्रेडर्स के कुल मुनाफे का 99% हिस्सा एल्गो एंटिटीज़ से आया. FY26 में 86% FPIs और 47% प्रॉप ट्रेडर्स ने एल्गो ट्रेडिंग का इस्तेमाल किया, जबकि इंडिविजुअल ट्रेडर्स में यह आंकड़ा सिर्फ 15% रहा.
प्रॉप ट्रेडर्स का कुल टर्नओवर में कितना हिस्सा है?
प्रॉप ट्रेडिंग डेस्क देश के डेरिवेटिव्स बाजार में कुल टर्नओवर का करीब 60% हिस्सा रखते हैं, जबकि FPIs का हिस्सा सिर्फ करीब 7% है. इंडेक्स ऑप्शंस में टॉप 10 प्रॉप फर्मों का वॉल्यूम शेयर 85% तक पहुंच जाता है.
FY26 में किन कैटेगरी का मुनाफा घटा?
FPIs के मुनाफे में सबसे बड़ी 55% की गिरावट आई, इसके बाद म्यूचुअल फंड्स में 54% और पार्टनरशिप फर्म/LLP में 38% की कमी दर्ज हुई. प्रॉप ट्रेडर्स का मुनाफा सिर्फ 3% ही घटा, जो सबसे कम गिरावट रही.
(निवेश से पहले सर्टिफाइड सलाहकार से सलाह लें.)
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