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हाइलाइट्स
- FY16 से FY26 के बीच नोशनल टर्नओवर ₹692 लाख करोड़ से बढ़कर ₹1,10,418 लाख करोड़ हुआ.
- डेरिवेटिव्स टर्नओवर अब कैश मार्केट टर्नओवर से 394 गुना ज़्यादा हो चुका है.
- इंडेक्स डेरिवेटिव्स का कुल टर्नओवर में हिस्सा FY16 के 77% से बढ़कर FY26 में 99% हुआ.
- इंडेक्स ऑप्शंस में 97% ट्रेडिंग अब सिर्फ एक हफ्ते या उससे कम की एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में होती है.
India Derivatives Market Growth: भारत का इक्विटी डेरिवेटिव्स बाजार पिछले एक दशक में जिस रफ्तार से बढ़ा है, उसकी झलक सेबी की अगस्त 2026 में जारी रिपोर्ट में साफ दिखती है. रिपोर्ट के मुताबिक नोशनल टर्नओवर FY16 के ₹692 लाख करोड़ से बढ़कर FY26 में ₹1,10,418 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. इसी दौरान डेरिवेटिव्स बाजार अब कैश मार्केट टर्नओवर के मुकाबले 394 गुना बड़ा हो चुका है, जबकि FY16 में यह अनुपात सिर्फ करीब 14 गुना था.
असल में यह उछाल किसी एक साल की बात नहीं, बल्कि लगातार कई सालों की रफ्तार का नतीजा है. FY21 से FY24 के बीच बाजार हर साल 97%, 159%, 119% और 128% की दर से बढ़ा. हालांकि हाल के दो सालों में यह रफ्तार धीमी पड़ी है- FY25 में 20.4% और FY26 में सिर्फ 4.2% की बढ़त दर्ज हुई.
इतना बड़ा आंकड़ा आखिर आया कहां से?
रिपोर्ट के मुताबिक यह पूरी ग्रोथ मुख्य रूप से इंडेक्स डेरिवेटिव्स यानी निफ्टी-सेंसेक्स जैसे इंडेक्स पर आधारित कॉन्ट्रैक्ट्स की वजह से आई है. कुल नोशनल टर्नओवर में इंडेक्स डेरिवेटिव्स का हिस्सा FY16 के 77% से बढ़कर FY26 में 99% हो गया, और FY23 से यह लगातार 98-99% के आसपास बना हुआ है.
खास बात ये है कि ट्रेडेड टर्नओवर के हिसाब से भी इंडेक्स डेरिवेटिव्स का हिस्सा FY22 के 24% से बढ़कर FY26 में 43% हो गया. यानी स्टॉक फ्यूचर्स और स्टॉक ऑप्शंस के मुकाबले अब निवेशकों का पूरा ध्यान इंडेक्स आधारित कॉन्ट्रैक्ट्स पर ही केंद्रित है.
| वित्त वर्ष | नोशनल टर्नओवर (₹ लाख करोड़) |
|---|---|
| FY16 | 692 |
| FY21 | 6,787 |
| FY24 | 87,956 |
| FY25 | 1,05,916 |
| FY26 | 1,10,418 |
फ्यूचर्स कमज़ोर पड़े, ऑप्शंस की रफ्तार भी धीमी हुई
FY26 में फ्यूचर्स टर्नओवर में 15% की गिरावट आई, जबकि इससे पहले FY25 में यह 41% बढ़ा था. वहीं ऑप्शंस प्रीमियम टर्नओवर 7% बढ़ा, लेकिन यह भी FY25 के 14% और उससे पहले के सालों के मुकाबले काफी धीमा रहा.
दरअसल ऑप्शंस की ग्रोथ लगातार कम होती जा रही है- FY23 में यह 73% थी, जो FY24 में 31%, FY25 में 14% और FY26 में सिर्फ 7% रह गई. फिर भी ऑप्शंस अब भी बाज़ार को आगे बढ़ाने वाला सबसे बड़ा इंजन बना हुआ है, क्योंकि फ्यूचर्स में सिकुड़न के बावजूद ऑप्शंस में बढ़त जारी है.
- FY26 में इंडेक्स ऑप्शंस टर्नओवर 9% बढ़ा
- इंडेक्स फ्यूचर्स में 16% और स्टॉक फ्यूचर्स में 15% की गिरावट
- स्टॉक ऑप्शंस में भी 10% की कमी दर्ज हुई
- इंडेक्स ऑप्शंस अब कुल ऑप्शंस एक्टिविटी का 91% हिस्सा
ट्रेडिंग अब क्यों सिमट गई है सिर्फ एक हफ्ते के कॉन्ट्रैक्ट में?
नवंबर 2024 से पहले इंडेक्स ऑप्शंस ट्रेडिंग मुख्य रूप से साप्ताहिक एक्सपायरी कॉन्ट्रैक्ट में केंद्रित थी, और चूंकि NSE और BSE पर अलग-अलग हफ्ते के दिन एक्सपायरी होती थी, इसलिए बाजार में लगभग हर कारोबारी दिन कोई न कोई एक्सपायरी इवेंट होता था.
20 नवंबर 2024 से सेबी ने हर एक्सचेंज को सिर्फ एक इंडेक्स पर साप्ताहिक कॉन्ट्रैक्ट देने तक सीमित कर दिया. इसके बाद इंडेक्स ऑप्शंस टर्नओवर में साप्ताहिक कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा अक्टूबर 2024 के करीब 98% से घटकर दिसंबर 2024 में करीब 82% पर आ गया, लेकिन बाद के महीनों में यह फिर से करीब 97% तक वापस पहुंच गया.
0DTE ऑप्शंस का मतलब क्या है और यह कितना बड़ा हो गया है?
0DTE यानी ‘ज़ीरो डेज़-टू-एक्सपायरी’ ऑप्शंस वो कॉन्ट्रैक्ट होते हैं जो अपनी एक्सपायरी वाले दिन ही ट्रेड किए जाते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक कुल इंडेक्स ऑप्शंस टर्नओवर में 0DTE कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा FY22 के 38% से बढ़कर FY25 में 70% तक पहुंच गया, हालांकि FY26 में यह थोड़ा घटकर 59% पर आया.
वहीं एक्सपायरी के एक दिन के भीतर वाली ट्रेडिंग यानी ‘1DTE या उससे कम’ का हिस्सा FY22 के 56% से बढ़कर FY25 में 80% हो गया, और FY26 में यह 75% पर रहा. यानी FY26 में हर 4 में से 3 इंडेक्स ऑप्शंस ट्रेड या तो एक्सपायरी वाले दिन हुए, या उससे ठीक एक दिन पहले.
मार्च 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक इंडेक्स ऑप्शंस के करीब 97% टर्नओवर में कॉन्ट्रैक्ट की बाकी बची ज़िंदगी 7 दिन या उससे कम थी, जबकि स्टॉक ऑप्शंस में यह आंकड़ा सिर्फ करीब 14% रहा. लंबी अवधि वाले कॉन्ट्रैक्ट का हिस्सा बेहद छोटा है- सिर्फ 3% टर्नओवर 7 दिन से ज़्यादा और सिर्फ 1% टर्नओवर 10 दिन से ज़्यादा एक्सपायरी वाले कॉन्ट्रैक्ट में हुआ.
एक्टिव ट्रेडर्स की संख्या में क्या बदलाव आया?
इस पूरी ग्रोथ के साथ-साथ ट्रेडर्स की तादाद में भी बड़ा बदलाव आया है. FY15 में करीब 7 लाख एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स थे, जो FY25 तक बढ़कर 1 करोड़ से ज़्यादा हो गए थे. हालांकि FY26 में यह आंकड़ा घटकर 87.5 लाख पर आ गया, जो FY16 के बाद ट्रेडर्स की संख्या में पहली सालाना गिरावट है.
फिलहाल यह साफ नहीं है कि आने वाले सालों में यह मार्केट और किस दिशा में बढ़ेगा, खासकर तब जब भागीदारी घट रही है लेकिन टर्नओवर अब भी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है. सेबी की अगली समीक्षा में इस बदलाव की दिशा और साफ होकर सामने आएगी.
जाने – F&O ट्रेडिंग में इस साल हुआ कितना घाटा
(डिस्क्लेमर : निवेश से पहले सर्टिफाइड सलाहकार से सलाह लें.)
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