अगर आपको लगता था कि गोल्ड लोन (Gold Loan) सिर्फ आम आदमी के काम की चीज है, तो जरा रुकिए। सरकारी बैंक इसी गोल्ड लोन के दम पर अब बंपर मुनाफा कमा रहे हैं। वजह है एक खास सर्टिफिकेट, जिसका नाम है PSLC।
वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून के आंकड़े देखें तो कई सरकारी बैंकों की गैर-ब्याज आय में तेज उछाल आया है। और इसके पीछे मुख्य वजह है गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की तेज ग्रोथ।
एक बैंकर की जुबानी
एक सरकारी बैंक के सीनियर बैंकर ने साफ कहा, फिलहाल सोना सबसे मुनाफे वाला लोन सेगमेंट बन गया है। PSLC बेचकर सरकारी बैंक जमकर कमाई कर रहे हैं।
Table of Contents
- आखिर PSLC है क्या, और इससे कमाई कैसे होती है?
- इंडियन ओवरसीज बैंक की कमाई ने चौंकाया
- सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया भी पीछे नहीं
- आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
- Q1. PSLC क्या होता है?
- Q2. गोल्ड लोन का PSLC कमाई से क्या कनेक्शन है?
- Q3. इंडियन ओवरसीज बैंक की PSLC कमीशन आमदनी कितनी बढ़ी?
- Q4. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने PSLC से कितना कमाया?
- Q5. बैंकों को कितना प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग करना अनिवार्य है?
आखिर PSLC है क्या, और इससे कमाई कैसे होती है?

यहां थोड़ा तकनीकी हिस्सा समझना जरूरी है। RBI के नियम के मुताबिक कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों, रीजनल रूरल बैंकों और को-ऑपरेटिव बैंकों को अपने एडजस्टेड नेट बैंक क्रेडिट (ANBC) का कम से कम 40% प्राथमिकता क्षेत्र को उधार देना होता है।
अब सवाल यह है कि जो बैंक यह टारगेट पार कर लेते हैं, उनका क्या? यहीं PSLC काम आता है।
PSLC यानी प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग सर्टिफिकेट के जरिए बैंक बिना असली लोन एसेट ट्रांसफर किए, अपने प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग ऑब्लिगेशन को खरीद-बेच सकते हैं। जिस बैंक ने टारगेट पार कर लिया, वो सरप्लस सर्टिफिकेट उस बैंक को बेच देता है जो टारगेट पूरा नहीं कर पाया। बदले में उसे फीस इनकम मिलती है।
गोल्ड लोन प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में गिना जाता है। यही वजह है कि जिन बैंकों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ा है, उनके पास बेचने के लिए ज्यादा सरप्लस सर्टिफिकेट हैं।
इंडियन ओवरसीज बैंक की कमाई ने चौंकाया
नंबर देखकर आप भी हैरान हो जाएंगे। इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) की PSLC कमीशन आमदनी वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के 48 करोड़ रुपये से बढ़कर 863 करोड़ रुपये हो गई।
यह उछाल 1,697.92% का है। पिछले साल की इसी तिमाही के 199 करोड़ रुपये से तुलना करें तो सालाना आधार पर यह बढ़ोतरी 333.67% रही।
इसी वृद्धि की बदौलत बैंक की कुल गैर-ब्याज आय पहली तिमाही में 2,160 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह पिछली तिमाही के 1,291 करोड़ रुपये से 67.31% ज्यादा है, और पिछले साल की समान तिमाही के 1,481 करोड़ रुपये से 45.85% अधिक।
IOB के MD का बयान
बैंक के परिणाम घोषित होने के बाद IOB के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि गैर-ब्याज आय में यह 45.85% की बढ़त मुख्य रूप से PSLC की बिक्री, बट्टे खाते में डाले गए खातों की वसूली और सामान्य गैर-ब्याज आय की वजह से आई है।
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया भी पीछे नहीं
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने भी इस तिमाही में 2,000 करोड़ रुपये के PSLC बेचे। वजह साफ है – बैंक का कुल प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग 40% की जरूरत के मुकाबले 58% तक पहुंच गया था।
कमजोर वर्गों को दिए गए लोन की बात करें तो यह ANBC का 17.35% रहा, जबकि अनिवार्य सीमा सिर्फ 12% है। कृषि लोन भी न्यूनतम 18% के मुकाबले 22.41% रहा।
बैंक के MD और CEO रजनीश कर्नाटक ने तिमाही नतीजों के बाद मीडिया को बताया कि सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने पहली तिमाही में PSLC बिक्री से 250 करोड़ रुपये कमाए।
गोल्ड लोन ही असली वजह
बैंकरों का साफ कहना है कि PSLC आमदनी में यह उछाल मुख्य रूप से गोल्ड लोन पोर्टफोलियो की तेज ग्रोथ की वजह से है। जिन बैंकों ने अपना प्रायोरिटी सेक्टर टारगेट पार किया, उन्होंने सरप्लस सर्टिफिकेट बेचकर मुनाफा कमाया।
एक और सरकारी बैंक के सीनियर बैंकर ने भी यही बात दोहराई – इस तिमाही में PSLC बिक्री से अच्छा लाभ हुआ है, और सोने का बिजनेस फिलहाल बहुत मुनाफे वाला बना हुआ है।
आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
गोल्ड लोन का बिजनेस जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए आने वाली तिमाहियों में भी सरकारी बैंकों की PSLC कमाई मजबूत रह सकती है। जिन बैंकों की गोल्ड लोन बुक बड़ी है, उनके लिए यह गैर-ब्याज आय बढ़ाने का एक स्थिर जरिया बनता दिख रहा है। निवेशकों और बैंकिंग सेक्टर पर नजर रखने वालों के लिए अगली तिमाही के नतीजे यह बताएंगे कि यह ट्रेंड कितना टिकाऊ है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल जानकारी और समाचार के मकसद से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी बैंकों के आधिकारिक तिमाही नतीजों और बैंकर्स के बयानों पर आधारित है। यह किसी भी तरह की निवेश सलाह, वित्तीय सलाह या बैंकिंग स्टॉक्स में लेन-देन की सिफारिश नहीं है।
बैंकिंग शेयरों या किसी भी वित्तीय प्रोडक्ट में निवेश से पहले पाठकों को अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। आंकड़े कंपनी की तिमाही घोषणाओं और बैंकर्स के बयानों पर आधारित हैं, बाजार की स्थितियां और भविष्य के नतीजे इनसे अलग हो सकते हैं। किसी भी वित्तीय फैसले की जिम्मेदारी पूरी तरह पाठक की खुद की होगी।
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सामान्य सवाल-जवाब
Q1. PSLC क्या होता है?
PSLC यानी प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग सर्टिफिकेट, जिसके जरिए बैंक बिना असली लोन ट्रांसफर किए अपने प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग ऑब्लिगेशन खरीद-बेच सकते हैं।
Q2. गोल्ड लोन का PSLC कमाई से क्या कनेक्शन है?
गोल्ड लोन प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग में गिना जाता है, इसलिए जिन बैंकों का गोल्ड लोन पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ा, उनके पास बेचने के लिए ज्यादा सरप्लस PSLC सर्टिफिकेट हैं।
Q3. इंडियन ओवरसीज बैंक की PSLC कमीशन आमदनी कितनी बढ़ी?
यह पिछली तिमाही के 48 करोड़ रुपये से बढ़कर 863 करोड़ रुपये हो गई, यानी 1,697.92% की बढ़त।
Q4. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने PSLC से कितना कमाया?
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने पहली तिमाही में PSLC बिक्री से 250 करोड़ रुपये कमाए।
Q5. बैंकों को कितना प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग करना अनिवार्य है?
RBI के नियमों के मुताबिक बैंकों को अपने एडजस्टेड नेट बैंक क्रेडिट (ANBC) का कम से कम 40% प्राथमिकता क्षेत्र को उधार देना होता है।
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