मुंबई : शेयर बाजार में इस समय लार्जकैप शेयरों का दबदबा साफ नजर आ रहा है। जनवरी से जुलाई 2026 के दौरान निफ्टी 50 की आधे से अधिक कंपनियां अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर पर पहुंची, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियां इस मामले में 31% और 27% के साथ काफी पीछे रहीं। पहली नजर में यह संकेत देता है कि फिलहाल बाजार से बेहतर रिटर्न यानी ‘अल्फा’ देने की दौड़ में लार्जकैप आगे है।
लेकिन बाजार विशेषज्ञों की राय अनिरुद्ध नाहा ने कहा, मौजूदा तेजी के बावजूद लंबी अवधि में बेहतर वेल्थ क्रिएशन का सबसे बड़ा अवसर चुनिंदा मिड और स्मॉलकैप कंपनियों में मिल सकता है। इसकी वजह स्मॉल-मिड कंपनियों की मजबूत अर्निंग ग्रोथ, घरेलू निवेशकों की लगातार बढ़ती हिस्सेदारी और कई सेक्टरों में लंबी विकास संभावनाएं है।
वहीं, लार्जकैप कंपनियों का प्रदर्शन कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक आर्थिक हालात और विदेशी निवेशकों के निवेश जैसे व्यापक आर्थिक कारकों से अधिक प्रभावित रहता है। ऐसे में विशेषज्ञ निवेशकों को सलाह दे रहे हैं कि वे केवल कंपनी के आकार पर Hel नहीं, बल्कि मजबूत बिजनेस मॉडल, टिकाऊ टिकाऊ कमाई कमाई और भविष्य की विकास क्षमता को आधार बनाकर निवेश का फैसला करें।
फंड मैनेजर क्यों जा रहे हैं मिडकैप की तरफ?
विशेषज्ञों का कहना है कि लार्जकैप शेयरों में वैल्यूएशन और रिटर्न की गुंजाइश सीमित होती जा रही है। इसी वजह से फंड मैनेजर अल्फा हासिल करने के लिए मजबूत बुनियाद वाली मिडकैप कंपनियों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर रहे हैं।
Table of Contents
- ‘हाई क्वालिटी-हाई ग्रोथ’ शेयरों की चांदी
- आज 28 जुलाई को बाजार का हाल कैसा रहा?
- आगे निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
- FAQs
- Q1. जनवरी से जुलाई 2026 में निफ्टी 50 की कितनी कंपनियां 52 हफ्ते के हाई पर पहुंचीं?
- Q2. एक्सपर्ट्स लंबी अवधि में किस सेगमेंट को बेहतर मानते हैं?
- Q3. हाई क्वालिटी हाई ग्रोथ वाले शेयरों ने कितना रिटर्न दिया?
- Q4. लार्जकैप फंड्स ने मिडकैप में कितनी हिस्सेदारी बढ़ाई?
- Q5. किस सेक्टोरल फंड ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया?
‘हाई क्वालिटी-हाई ग्रोथ’ शेयरों की चांदी
बाजार में इस वक्त उन कंपनियों का पलड़ा भारी है जिनकी सेल्स ग्रोथ औसत से ज्यादा रही, और जिन्होंने इक्विटी पर अच्छा रिटर्न (ROE) दिया।
PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड की रिपोर्ट के मुताबिक, इस वित्त वर्ष में ‘हाई क्वालिटी और हाई ग्रोथ’ वाले शेयर सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेगमेंट बनकर उभरे हैं।
1 अप्रैल 2026 से अब तक इन कंपनियों ने औसतन 27% रिटर्न दिया है। वजह जानकर हैरान रह जाएंगे, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में इसी सेगमेंट का रिटर्न निगेटिव यानी -4% रहा था।
पिछले 5 साल में इस सेगमेंट ने 33% CAGR रिटर्न दिया है। फंड हाउस का कहना है कि यह ट्रेंड पहले के उस दौर के बिल्कुल उलट है, जब कम ग्रोथ और कम क्वालिटी वाले शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया था।
गुणवत्ता वाले शेयरों को प्राथमिकता मिलने के पीछे विदेशी निवेशकों की वापसी और घरेलू कंपनियों की मजबूत आय, दोनों वजहें अहम मानी जा रही हैं।
सेक्टोरल SIP का रिटर्न भी चौंकाने वाला
अगर एक साल के औसत रिटर्न पर नजर डालें, तो सेक्टोरल फंड्स में भी बड़ा फर्क दिखता है।
| फंड श्रेणी | रिटर्न |
|---|---|
| सेक्टोरल (फार्मा) | 25.6% |
| सेक्टोरल (इन्फ्रा) | 20% |
| स्मॉलकैप | 16.6% |
| मिडकैप | 11.0% |
| मल्टीकैप | 8.9% |
| सेक्टोरल (टेक) | -12.3% |
फार्मा और इन्फ्रा सेक्टर में सबसे ज्यादा रिटर्न मिला, जबकि टेक सेक्टर की हालत सबसे कमजोर रही। इससे साफ है कि अभी हर सेक्टर एक जैसा प्रदर्शन नहीं कर रहा।
लार्जकैप फंड्स खुद मिडकैप में बढ़ा रहे हिस्सेदारी
यहीं पर सबसे दिलचस्प बात सामने आती है। लार्जकैप म्यूचुअल फंडों ने अपने पोर्टफोलियो में मिडकैप शेयरों की हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.2% कर दी है, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
यानी फंड मैनेजर अब सिर्फ बेंचमार्क में शामिल बड़ी कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना चाहते। कुछ बड़े लार्जकैप फंडों में यह बदलाव साफ दिखता है।
| फंड (स्कीम) | लार्जकैप में घटाई हिस्सेदारी | मिडकैप में बढ़ाई हिस्सेदारी |
|---|---|---|
| एचडीएफसी लार्जकैप | -7.44% | 8.46% |
| सुंदरम लार्जकैप फंड | -4.44% | 6.63% |
| आदित्य बिड़ला लार्जकैप | -3.28% | 5.98% |
| फ्रेंकलिन इंडिया लार्जकैप | -4.59% | 4.72% |
| बीएनपी परिबा लार्जकैप | -2.16% | 3.52% |
| मोतीलाल ओ. लार्जकैप | -5.28% | 3.17% |
HDFC लार्जकैप ने सबसे ज्यादा बदलाव किया है, इसने लार्जकैप में 7.44% हिस्सेदारी घटाकर मिडकैप में 8.46% बढ़ा दी। बाकी फंड हाउस भी इसी दिशा में आगे बढ़ते दिख रहे हैं।
आज 28 जुलाई को बाजार का हाल कैसा रहा?
खबर लिखे जाने के दौरान अमेरिका-ईरान के बीच जंग रुकने से मंगलवार को Brent Oil Futures 2.78 डॉलर यानी 3.24% की गिरावट के साथ 83.09 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है ।
इसके साथ सेंसेक्स 31.50 अंक गिरकर 76,804.28 पर पहुंच गया। निफ्टी भी 3.10 अंक टूटकर 23,992.85 के आसपास ट्रेड करता दिखा। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स दोनों में 0.14% की मामूली गिरावट देखी जा रही है ।
आगे निवेशकों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
बाजार का यह ट्रेंड साफ इशारा करता है कि सिर्फ कंपनी के साइज को देखकर निवेश करना अब पुरानी सोच बनती जा रही है। फंड मैनेजर खुद मजबूत बुनियाद वाली मिडकैप कंपनियों की तरफ रुख कर रहे हैं। अगर आप भी लंबी अवधि के लिए निवेश की सोच रहे हैं, तो सिर्फ लार्जकैप की मौजूदा तेजी देखकर फैसला लेने के बजाय कंपनी की क्वालिटी, ग्रोथ और सेक्टर की संभावनाओं को भी परखना जरूरी है।
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FAQs
Q1. जनवरी से जुलाई 2026 में निफ्टी 50 की कितनी कंपनियां 52 हफ्ते के हाई पर पहुंचीं?
इस दौरान निफ्टी 50 की आधे से ज्यादा कंपनियां अपने 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचीं, जबकि मिडकैप में यह आंकड़ा 31% और स्मॉलकैप में 27% रहा।
Q2. एक्सपर्ट्स लंबी अवधि में किस सेगमेंट को बेहतर मानते हैं?
बाजार विशेषज्ञ अनिरुद्ध नाहा के मुताबिक, लंबी अवधि में सबसे बड़ा वेल्थ क्रिएशन अवसर चुनिंदा मिड और स्मॉलकैप कंपनियों में मिल सकता है।
Q3. हाई क्वालिटी हाई ग्रोथ वाले शेयरों ने कितना रिटर्न दिया?
PGIM इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 1 अप्रैल 2026 से अब तक इन शेयरों ने औसतन 27% रिटर्न दिया है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह -4% था।
Q4. लार्जकैप फंड्स ने मिडकैप में कितनी हिस्सेदारी बढ़ाई?
लार्जकैप म्यूचुअल फंडों ने अपने पोर्टफोलियो में मिडकैप शेयरों की हिस्सेदारी बढ़ाकर 9.2% कर दी है, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
Q5. किस सेक्टोरल फंड ने सबसे ज्यादा रिटर्न दिया?
एक साल के औसत रिटर्न में सेक्टोरल फार्मा फंड ने सबसे ज्यादा 25.6% रिटर्न दिया, जबकि सेक्टोरल टेक फंड -12.3% के साथ सबसे पीछे रहा।
डिस्क्लेमर – यह आर्टिकल केवल जानकारी और समाचार के मकसद से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी बाजार विशेषज्ञों की राय, फंड हाउस रिपोर्ट और मौजूदा बाजार के आंकड़ों पर आधारित है। यह किसी भी तरह की निवेश सलाह नहीं है। शेयर बाजार जोखिमों के अधीन है, और म्यूचुअल फंड निवेश से पहले पाठकों को अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लेनी चाहिए। पुराना प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता।
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